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Sunday

#Selfiewithdaughter कोई समाधान नही, एक पहल है

पिछले सप्ताह 'मन की बात' में प्रधानमंत्री जी ने हरियाणा के एक गाँव के सरपंच के #Selfiewithdaughter की सराहना की, साथ ही उन्होंने देशवासियों से भी आग्रह किया कि वे भी इस तरह की मुहिम में हिस्सा लें ।

देखते ही देखते, ट्विटर पर #SelfieWithDaughter एक ट्रेंड चल पड़ा, जो सिर्फ देश में ही नही विश्व स्तर पर भी ट्रेंड करने लगा ।

जाहिर सी बार है, किसी भी मुद्दे पर लोगों की राय अलग अलग हो सकती है, सो वैसा ही हुआ, जिसमे अभिनेत्री श्रुति सेठ की ट्वीट जो पूरे इस ट्विटर कैम्पेन से सहमत नही थी, उन्होंने अपनी असहमति प्रधानमंत्री के साथ दर्ज करायी, उसमे कोई बुरी बात नही थी ।

पर कुछ लोगों का इस पर रिएक्शन काफी निराशाजनक, अशोभनीय और बुरे स्तर का था । ये पूरे कैम्पेन का मूल ही ख़त्म कर देता है।

दूसरा ट्वीट जिसकी काफी आलोचना हुई वो थी कविता कृष्णन की ट्वीट, ये उस चलन को दिखाता है जो आजकल देखा जा रहा है कि कुछ स्वम्भू बुद्धिजीवी 'एंटी-मोदी' लिखने को बड़ा ही 'कूल' और 'इन्टलेक्चूअल' समझते है ।

यहाँ मैं उस पर ज्यादा बात नही करना चाहता हूँ।

पहली बात, इस बात मैं पूर्णतः सहमत हूँ कि ट्विटर पर कैम्पेन चलाना, इस तरह की समस्या का कोई हल नही है ।
पर इससे नुकसान भी तो कुछ नही है?
यहाँ मैं बताना चाहूँगा कि ट्विटर पर जो लोग ट्रेंड चलाते या बनाते है वो ज्यादातर शहरी यूजर होते है जहाँ समस्या इतनी गंभीर नही है।

जहाँ समस्या ज्यादा गंभीर है वो ट्वीटर चलाते नही है ।

तो फिर इसका क्या कोई फायदा है?

है,

क्योंकि, ये समस्या सदियों से है और भारतियों के रग रग में बसी सी लगती है, इस मामले में सरकारें योजनाएं बना सकती है और उन्हें लागू करा सकतीं है ।
और जहाँ सोच बदलने की बात आती है तो उसके लिए पहले की सरकारें भी प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का सहारा लेती आयीं हैं ।

अगर इस बार, प्रधानमंत्री मार्केटिंग और प्रचार के लिए 'सोशल मीडिया' का सहारा लेते है तो इसमें बुरा क्या है?

अगर इस पूरे कैम्पेन को सकारात्मकता से देखा जाए तो कुछ बुरा नही है?

हाँ, अगर इस पूरे घटनाक्रम को "रेडिकल फेमिनिज़म" के चश्मे से देखेंगे, तो फिर अभी बात काफी लंबी चलेगी ।

Saturday

व्यावसायिकता तो कम नही है “हिंदी(Hindi)" में…फिर क्या कारण है कि “अंतर्जाल (Internet)" पर हिंदी की स्थिति इतनी अच्छी नही है?

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हिंदी भाषा को अगर उसके बोलने वालों की संख्या और भौगोलिक प्रसार की द्रष्टि से देखा जाए, तो पता चलता है कि हिंदी विश्व की मुख्य भाषायों की सूची में एक अहम् स्थान रखती है | पर अगर इसको  इन्टरनेट पर प्रचार प्रसार की द्रष्टि से देखा जाए, तो अन्य भाषायों (अंग्रेजी को छोड़कर) से काफी पीछे है |

जब इसके कारणों पर चर्चा करते हैं तो कई कारण है जो सामने आते हैं, जैसे जो हिंदी पढता, बोलता है वो इन्टरनेट पर बहुत कम संख्या में हैं, हिंदी में इन्टरनेट पर ज्यादा कंटेंट नही हैं, हिंदी लिखना आसान नही है इत्यादि इत्यादि |

पर अगर हम सभी कारणों पर अगर ध्यान से सोचें तो पता चलता है कि ठीक इसके उल्ट चाहे वो सिनेमा हो या टी.वी. या फिर विज्ञापन की दुनिया,  वहां हिंदी को लेकर नए प्रयोग भी किये जा रहे हैं, जैसे क्रिकेट के पुर्णतः हिंदी चैनल और भी सभी न्यूज़ और डेलीशॉप भी हिंदी में ही हैं …और वो अच्छा भी कर रहे हैं,

कुल मिलाकर कह सकतें हैं कि टी.वी. एडवरटाइजिंग और सिनेमा में हिंदी को अंग्रेजी से कोई खतरा नही दिखता …तो यहाँ तो हिंदी को अगर व्यावसायिक (Commercial) नजर से देखा जाए…तब भी काफी सफल है |

तो ऐसा क्या है ..जो इन्टरनेट पर हिंदी की रफ़्तार को मंद किये हुए है ?

पहला तर्क हो सकता है कि हिंदी पढने और बोलने वाले ज्यादा संख्या में इन्टरनेट इस्तेमाल नही करतें है ….मैं इस तर्क से सहमत नही, क्योंकि युवा से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक ..बड़ी तादात है जो हिंदी बोलती है और इन्टरनेट यूज कर रही है |

ऐसा भी नही है कि हिंदी में साइट्स की कमी है …लगभग सभी बड़ी बड़ी साइट्स के ‘हिंदी वर्जन' हैं …जैसे फेसबुक, गूगल, जी-मेल, IRCTC सभी की  हिंदी साइट्स हैं |

जो हिंदी लिखने की बात आती है, वहां पर भी अब गूगल और माइक्रोसॉफ्ट और कई अन्य के इनपुट टूल्स आने के बाद हिंदी लिखना बहुत ही आसान हो गया है |

तो फिर क्या कारण है ?

मेरे अनुसार …लोग हिंदी बोलते तो हैं ..पर पढ़ने या लिखने से कतराते हैं |

इसमें दो बातें हैं, लोग तभी तो पढेंगे या सर्च करेंगे …जब उन्हें सामग्री हिंदी में उपलब्ध मिलेगी |

और ज्यादातर स्वदेशी ब्लोगर/लेखक भी अंग्रेजी में ही लिखते हैं ..अब उनका तर्क होता है …कि हिंदी कोई पढ़ता नही हैं और पाठकों का तर्क होता है …कि हिंदी में कोई लिखता नही |

इन दोनों में बेहतर बैलेंस ही हिंदी के स्थिति को सुद्रढ़ कर सकता है …हिंदी में जब अच्छा लिखा जायेगा …तो कुछ हो सकता है ..आगे

पर मैं तो सकारात्मक हूँ …कई लोग तथा संस्थाएं इस दिशा में अपना अथक योगदान दे रहीं हैं , पर इसमें प्रशासन को अब निर्लज्जता को त्यागकर …हिंदी के लिए खानापूर्ति छोड़कर सार्थक प्रयास करने होंगे ..ऐसा चाइना ने कर दिखाया है …अपनी “भाषा" को लेकर …हम क्यों नहीं कर सकतें है |

मुझे इस पर और भी कारण जानने हैं, कृपया अपनी राय जरूर दें |

Sunday

व्हाटसएप्प इमेजिज को गैलरी में कैसे छुपायें (How to hide WhatsApp images from Gallery)

WhatsApp अब लगभग सभी स्मार्टफोन यूजर्स के लिए दैनिक संपर्क, संवाद , शेयरिंग और चैटिंग का माध्यम बन चुका है, इसमें कोई दोराय नहीं है ।

अब जब ये फ्रेंड्स, फैमिली और वर्क लाइफ सभी से जुड़ चुका है, तब कई बार ऐसी परिस्थितयां आ जाती है, जब आपका कोई न कोई फ्रेंड आपकी प्राइवेसी को ताक पर रखकर, आपको कुछ ऐसी तस्वीरें (Images) या विडियो (Video) शेयर कर देतें है, जो आपके फैमिली सदस्य के सामने आपको असहज स्थिति में डाल सकतें हैं ।

अब ऐसी स्थिति में आपके पास एक विकल्प है कि गैलरी (Gallery) को ही लॉक कर दिया जाए, पर इस अवस्था में आप और भी शक के घेरे में आ सकते हो ..

दूसरा विकल्प बचा, कोई ऐसा तरीका हो जिससे सिर्फ WhatsApp Images और videos लॉक हो जाएँ , वो भी बिना किसी एप्प के ।

चलो, दूसरा विकल्प ही बताते हैं ...आपको

इसके लिए आपके पास एक File Explorer app होना चाहिए, जो लगभग सभी फोन में होता ही है, मैं यहाँ ES File Explorer के जरिये आपको बता रहा हूँ ।

1. File Explorer ओपन कीजिये और वहां से आप Home-> sdcard-> WhatsApp > Media ->WhatsApp Images फोल्डर तक पहुँचिये ।

  7 June 2015 84534 am IST

2. फोल्डर के अंदर .nomedia नाम से एक नई फ़ाइल बना लीजिये ।

7 June 2015 91301 am IST

या फिर सिर्फ "WhatsApp Images" फोल्डर को ही ".WhatsApp Images" नाम से रीनेम कर दीजिये ।

इसके बाद आपको गैलरी में कोई WhatsApp images नही दिखेगीं । पर ध्यान रहें ये images रहेंगी आपके फोन में ही ...इन्हें आप इसी फोल्डर (File Explorer के जरिये) आकर देख सकतें है ।

अगर आपको फिर से ये फोल्डर गैलरी में दिखाना है तो उक्त फ़ाइल (.nomedia) डिलीट कर दीजिये, अगर साधारणतः ये फ़ाइल आपको दिखे नही, इसका मतलब ये hide होगी, उसको unhide करने के लिए Es File Explorer के Main Menu  के Tool आप्शन से unhide कर सकतें हैं ।

ऑनलाइन शॉपिंग कैसे करें ? [Online Shopping guide in Hindi]

आजकल इन्टरनेट यूजर्स के लिए ऑनलाइन शॉपिंग कोई नया शब्द नही है, साथ ही जो अभी तक इन्टरनेट से नही जुड़े हैं, उनमे से भी कईयों को भी  टी.वी., समाचार-पत्र और बाहर भी विज्ञापनों के माध्यम से इसका पता चल चुका होगा |

बेशक अपने देश ने पिछले 2-3 सालों में इस क्षेत्र में अप्रत्याशित वृद्धि हासिल की है, और  कई रिसर्च और सर्वे  एजेंसियां इसके अगले 2 सालों में दुगुना होने का भी अनुमान लगा रहीं है; इस लिहाज़ से अभी एक बड़ी संख्या में नए लोग ‘ऑनलाइन शॉपिंग' करने वाले हैं |

कई लोग ऐसे भी हैं, जो इन्टरनेट तो यूज करतें हैं, पर ‘ऑनलाइन शॉपिंग' के बारे में ढेर सारी शंकाएं हैं, जिस वजह से वे इससे दूर हैं, मेरे पास कई मित्र पूंछते हैं कि …क्या ‘ऑनलाइन शॉपिंग’ सुरिक्षित है ? और ये कैसे की जाती है ?

नए यूजर्स के लिए, मैं ये पोस्ट लिख रहा हूँ, व्यक्तिगत रूप से मैं ज्यादातर शॉपिंग ऑनलाइन ही करता हूँ |

यहाँ मैं फ्लिप्कार्ट (Flipkart) के जरिये शुरू से अंत तक, कोई प्रोडक्ट खरीदनें का पूरा प्रोसेस बता रहा हूँ,  ये प्रक्रिया और दूसरी साइट्स जैसे Snapdeal, Amazon की भी प्रक्रिया समान ही है |

1. Flipkart.com का होमपेज :

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2. साईट पर अकाउंट बनाना (Sign up):

Flipkart पर अकाउंट बनाने के लिए आपके पास एक ई-मेल पता होना चाहिए, और एक पासवर्ड जो आप अपनी मर्जी अनुसार चुन सकते हो |

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3. अपना प्रोडक्ट सर्च करना :

आप यहाँ जो प्रोडक्ट खरीदना है, वो सर्च भी कर सकतें हैं या फिर केटेगरी के जरिये भ्रमण करते हुए, वहां तक पहुँच सकते हो |

उदाहरण के लिए मैं यहाँ जियाओमी (Xiaomi) कंपनी का Redmi 2s मॉडल, जो सिर्फ ऑनलाइन ही ख़रीदा जा सकता है, और वो भी सिर्फ फ्लिप्कार्ट(Flipkart) से ही, उसके बारे में बता रहा हूँ |

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4. प्रोडक्ट पेज :

सर्च के जरिये या केटेगरी के जरिये आप प्रोडक्ट के मुख्य पेज पर पहुँच गए है, यहाँ आपको प्रोडक्ट के बारे सारी जानकारी मिल जायेगी, जिन बातों पर ज्यादा ध्यान देना हैं वो हैं प्रोडक्ट की रेटिंग, रिव्यु (review), सेलर (Seller) की रिव्यु, कीमत, ई.एम.आई, फ़ोटो, कलर, विवरण, प्रोडक्ट के बारे में पूरी जानकारी आदि आदि |

सभी बातों को ध्यान से पढ़ लें |

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“Buy Now” पर क्लिक करके एक प्रोडक्ट खरीद सकते हो, अगर आप एक से ज्यादा प्रोडक्ट्स खरीदना चाहते हो, पहले प्रोडक्ट “Add to card” पर क्लिक करके …”शॉपिंग कार्ट" में इकठ्ठे करते जाईये, बाद में एक साथ “चेक-आउट” और “पेमेंट (Payment)” कर सकते हो |

5. पता दर्ज करना :

अगर आप अपनी शॉपिंग पूरी कर चुके हैं, और जब “Buy Now” या “Check out” पर क्लिक करेंगे, तब आपके सामने आखिरी पेज होगा, जिसमे आपको अपना पता , जहाँ आपको वो प्रोडक्ट चाहिए , भरना होगा |

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6. आर्डर विवरण (Order detail)

पता भरने के बाद आपको अपने आर्डर के बारे पूरी डिटेल दिखाई देगी, जिसमे अनुमानित पहुँचने का समय, कुल राशि जो आपको भुगतान करनी है आदि आदि |

अगर आपके पास कोई कूपन कोड, ऑफर कोड है तो वो भी आप यहाँ आजमा सकते हो, अगर सही हुआ तो उतनी ही राशि कुल राशि से कम हो जायेगी |

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7. भुगतान विकल्प (payment options):

वैसे तो लगभग सभी शॉपिंग साइट्स पर नेटबैंकिंग, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, ई.एम.आई. , कैश कार्ड और “कैश ऑन डिलीवरी" विकल्प मौजूद होतें हैं, भुगतान करने के लिए, पर नए ग्राहक ज्यादातर “कैश ऑन डिलीवरी(COD)" चुनते है, जिसमे कि आपको पैसे तब देने होते हैं, जब आपको प्रोडक्ट मिल जाता है |

अगर इसके लिए अतिरिक्त शुल्क होगा, तो बिल के टोटल में जोड़ दिया जाएगा, जो आपको इसी पेज पर पता चल जाएगा |

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8. आर्डर कन्फर्म कीजिये :

“Confirm Order” पर क्लिक करके आप अपना आर्डर कन्फर्म कर दीजिये | इसके बाद आपको इसका एक कन्फर्मेशन न. मिलेगा, जो आपके ई. मेल तथा मोबाइल पर एसएमएस के जरिये भी मिल जायेगा |

अगर आप आर्डर को कैंसिल करना चाहते हैं, तो इसी पेज से कैंसिल(Cancel) भी कर सकते हैं |

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इस पोस्ट का मकसद सिर्फ नए लोगों को ऑनलाइन शॉपिंग की पूरी प्रक्रिया के बारे में बताने के लिए था, किसी एक साईट विशेष का प्रचार करना नहीं, अब किसी न किसी साईट का तो सहारा लेना ही पड़ता, सो flipkart को चुना |

वैसे अन्य साइट्स जैसे snapdeal.com , amazon.in , infibeam.comका प्रोसेस भी लगभग समान ही है |

अपने एंड्राइड फोन पर प्रतिदिन स्वतः नया वॉलपेपर कैसे लगायें [Daily auto changing Android Wallpaper]

अगर आपके पास एंड्राइड फ़ोन है, और आप उसको सजाने सवांरने में ज्यादा समय बिताते है तो उसमे काफी समय तो बढ़िया सा वालपेपर का चयन में गुजरता होगा ।

तो अगर आपको कोई ऐसा तरीका मिल  जाएँ  जिससे आपको  प्रतिदिन एक बेहतरीन वॉलपेपर आपकी होमस्क्रीन पर लगा हुआ मिले, वो भी बिना कुछ किये, तो कैसा रहेगा ?

न जी न कोई ऐसा वैसा एप्प (Apps) का सुझाव नही देने वाला हूँ, जो विज्ञापनों से पटा पड़ा हो, जिससे कि आपका डेटा (Data) और RAM को अनावश्यक रूप से बर्बाद करें ।

IFTTT logoमैं यहाँ आपको एक बेहतरीन वेब आधारित सर्विस  से परिचय कराने जा रहा हूँ, जिससे हो सकता हो आप में से बहुत से  लोग पहले से ही परिचित हों, फिर भी जो नये हैं ...उनके लिए ...!

IFTTT (इफ्ट):

अगर हम IFTTT शब्द को ही देखें ...तो इसका पूरा मतलब समझ आ जायेगा कि ये है क्या ...ये संक्षेप रूप है .."If This Then That" वाक्य का ।

यहाँ "This" की जगह पर कोई वेब सर्विस (जैसे जीमेल, फेसबुक, ट्विटर आदि आदि ) को रख लीजिये ....और "Then" की जगह पर कोई ट्रिगर(कोई कंडीशन)  और फिर "That" की जगह पर कोई दूसरी वेब सर्विस .....।

कुल मिलाकर ...IFTTT एक ऐसी वेब सर्विस है, जिससे आप किसी एक  वेब सर्विस की किसी शर्त पूरी होने पर किसी दूसरी वेब सर्विस को स्वतः चला सकते हो । 

इस तरीके से तैयार हुई पूरी लॉजिकल चेन (Chain) को यहाँ "रेसिपी (Recipe)" कहते है और उपलब्ध वेब सर्विसेस को यहाँ "चैनल (Channel) बोला जाता है ।

यहाँ पर बहुत सी उपयोगी "रेसिपी (Recipe)" पहले से ही बनी पड़ी हैं .....बस आप अपनी जरुरत के अनुसार अपनी थाली में सजाते जाईये ।

अब सीधे विषय पर आता हूँ, कि IFTTT के जरिये ...आप अपने Android होमस्क्रीन का वॉलपेपर प्रतिदिन स्वतः कैसे चेंज कर सकते है ।

इसके लिए कई रेसिपी हैं यहाँ ..जिन्हें आप सर्च कर सकते हो ...या अपनी खुद की भी रेसिपी बना सकते हो,

 मैं यहाँ आपके साथ जो रेसिपी शेयर करने जा रहा हूँ ..वो 500px साईट पर Editor's Choice में से एक वॉलपेपर प्रतिदिन आपके फोन के वालपपेर के रूप में लग जाया करेगा ।

इसके लिए आपको पहले IFTTT का एंड्राइड एप्प डाउनलोड करके Android device चैनल सक्रिय करना पड़ेगा, फिर चाहे तो आप उसी एप्प से भी ये रेसिपी सर्च करके सेट-अप कर सकते है या फिर PC या Laptop पर वेबसाइट से भी कर सकतें हैं ।

वेबसाइट रेसिपी की लिंक नीचे शेयर कर रहा हूँ ।
IFTTT Recipe: 500px Editor's Choice to Android Wallpaper connects 500px to android-device
 
 वेबसाईट या फिर एंड्राइड एप्प दोनों जगह जो बाते ध्यान रखनी हैं, वो हैं दोनों चैनल 500px पर Android सक्रिय होने चाहिए | 500px चैनल जब आप सक्रिय करने जायेंगे, तब आपको अपनी मनपसंद वॉलपेपर केटेगरी चयन करने का भी विकल्प भी मिलेगा, जिसे आप बाद में चेंज भी कर सकते हैं |

एप्प में स्टेप-बाई-स्टेप (Step by Step):

1. Android device चैनल सक्रिय करें :

एप्प में ही होमस्क्रीन के ऊपर दाहिने ओर My recipe icon पर टैप करके ..फिर Setting icon टैप करके Setting भाग पहुँचिये, जहाँ आपको चैनल आप्शन मिलेगा |





यहाँ सर्च करें Android device ....ओपन करके इसे activate कर दीजिये |


2 .इसी तरह 500px चैनल को भी सक्रिय कर लीजिये |


३. अब My Recipe पेज पर वापिस जाईये, यहाँ (+) icon पर टैप करके, उपरोक्त रेसिपी को सर्च  करके सक्रिय कर लीजिये | यहाँ से आप रेसिपी को जांच, सम्पादित या हटा भी सकते हो |

 
यहाँ वॉलपेपर स्वतः चेंज करने का तरीका मैंने जानभूझकर IFTTT के जरिये बताया, जिससे की आपका परिचय IFTTT से करा सकूं, और इसकी  असीम संभावनाओं से भी |


आगे समय समय पर IFTTT की बेहद उपयोगी रेसिपी शेयर करता रहूँगा |
 

Thursday

यादें कोच्चि (Kochi) की: ब्लोगर्स, बीच और क्रिसमस (भाग- 1)

कोच्चि (या कोचीन ) का नाम आते ही प्राचीनता और ऐतिहासिकता स्वतः ही जेहन में आ जाती है, कोच्चि भारत के दक्षिण छोर पर केरल राज्य के तटवर्ती जिले ‘एर्नाकुणम’ का एक शहर है | इसका महत्त्व सांस्कृतिक के साथ साथ व्यावसायिक भी काफी है |

ये तो रहा शहर के बारे में एक संक्षिप्त परिचय, अब बताते है अपनी यात्रा का अनुभव…….,

पोस्ट के शीर्षक में “ब्लोगर्स” शब्द बताता है कि मेरी इस यात्रा का ब्लोगिंग से जरूर कुछ ना कुछ कनेक्शन रहा होगा, हाँ तो बताते है, दरअसल इंडीब्लोगर (IndiBlogger) पर निसान इंडिया (Nissan India) द्वारा प्रायोजित एक कॉन्टेस्ट था, जिसका विषय था – ‘सड़क सुरक्षा (Road Safety)’

जिसमे से टॉप 5 विजेता को कोच्चि में हो रहे Nissan Safety Driving Forum (NSDF) के इवेंट में भाग लेना था, उसके 5 विजेतायों में से किन्हीं दो विजेतायों के कोच्चि जाने में असमर्थता जताने पर, मुझे मौका दिया गया | मेरी इस कॉन्टेस्ट में भेजी गयी पोस्ट को यहाँ से पढ़ सकते है |

दिल्ली से जाने वाले प्रतिभागियों में मेरे अलावा दिल्ली से ही ब्लोगर  Manjulika Pramod थी, उनकी पोस्ट आप यहाँ से पढ़ सकते है | इनके अलावा मुंबई से Khushboo Motihar, चेन्नई से Kishore Kumar और जयपुर से Prasad Np जी थे ..

हमारी फ्लाइट ने हम लोगों कोच्चि में करीब 11:00 am पर पंहुचा दिया, दिल्ली से चले थे ..पूरी तरह पैक होगे ..तब भी सुबह सुबह कंपकंपी वाली हालत …कोच्चि में हम स्वेटर, जर्सी वाले इक्का-दुक्का लोग …सिर्फ अपनी ही तरफ देख रहे थे …कि कब ये गरम कपडे उतारे ..और कुछ राहत  मिले |

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एयरपोर्ट से आगे का रास्ता, साईट-सीइंग  और ठहरने के ठिकाने के लिए हम लोगों को कोई चिंता करने की आवश्यकता नहीं थी, सारा कुछ पहले से ही तय था, एयरपोर्ट पर कैब आ गयी थी, वहां से कैब में बैठे …और वहां से पहले होटल जाना ही उचित समझा |

एयरपोर्ट से होटल की दूरी करीब 35 km थी, उस दूरी के बीच भी काफी कुछ नया देखने को मिला …और कुछ वहीँ पुराना जो दिल्ली जैसा ही था …पहला आश्चर्य मुझे तब हुआ जब कैब में हिंदी गाने बजते हुए सुने …तब कैब ड्राईवर का परिचय जानने की भी उत्सुकता हुई ..तब पता चला कि वो हिंदी में अच्छी तरह से बात कर सकते है …और एक्स-सर्विस मैन थे CRPF के  ..

रास्ते में दिल्ली से जो अलग बात दिखाई दी वो थी लोकल ट्रांसपोर्ट …बड़े स्तर पर आपको लाल रंग की प्राइवेट बसें ही दिखाई देंगी, जो कुछ कुछ तो दिल्ली में पहले चलने वाली ब्लू-लाइन बसों जैसी लगती है, नया इनमे ये था …कि किसी भी बस में खिडकियों के शीशे नही थे …कारण समझ नही पाया …दूसरे दिन Prasad जी ने इसका एक कारण बताया कि द. भारत में वामपंथियों का प्रभुत्व ज्यादा होने की वजह से आये दिन हड़ताल, चक्का जाम, पथराव होना आम बात है , इसीलिए यहाँ के बस मालिक शीशा लगवाते ही नही है ……Smile

 

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ये पिक्चर मेरे कैमरे की खींची हुई नही है, कैब में चलते चलते संभव भी नहीं हो पा रहा था, कि फोटो ले सकूँ, तो इसके मूल फोटोग्राफर का आभारी हूँ मैं….

इसके अलावा भी बहुत कुछ नया था ..जैसे दिल्ली के तरह राजनीतिक पार्टियों के विज्ञापनों से पड़ी पड़ी दीवारें नही थी, नारियल और केले के पेड़ों की बहुतायत, फॉर्मल वेशभूषा में पेंट की लुंगी, दिल्ली के पानी के ठेले की जगह पर नारियल पानी के ठेले ..आदि आदि |

अब बताते है कि दिल्ली और यहाँ एक जैसा क्या था …वो था ..ट्रेफिक जाम, मनमानी ड्राइविंग स्टाइल (चाहे तो इसे इंडियन स्टाइल ऑफ़ ड्राइविंग कह सकते हैं), मेट्रो का कंस्ट्रक्शन ….

जी हाँ, मेट्रो का कंस्ट्रक्शन …पहली बार तो मुझे भी लगा कि कहीं दिल्ली में ही तो नहीं है …क्योंकि यहाँ के मेट्रो का भी काम DMRC के सहयोग से ही किया जा रहा है, अब आप यही द्श्य देखिये …

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आपको बता दूँ …कि ‘मेट्रोमैन’ श्रीधरन जी भी केरल से ही हैं और कोच्चि मेट्रो में भी श्रीधरन जी का अहम योगदान रहने वाला है |

ट्रेफिक की बात करूँ …तो हालात बहुत ही ख़राब थे …ड्राईवर ने स्पष्टीकरण जरूर दिया कि आज छुट्टी का दिन है …और कोच्चि का एकमात्र और सबसे बड़ा शोपिंग मॉल …लुल्लु मॉल (Lullu Mall) ..भी रास्ते में है ..इस वजह से ज्यादा जाम है …पर ये बात मुझे तो पची नही ….

कभी कभार तो लगता है कि अपने देश की ये बेहद गंभीर समस्या बनती जा रही है …और दूसरी तरफ हमारे नीति निर्माताओं की  इसमें कोई गंभीरता दिखती नही है |

ट्रेफिक में धीरे धीरे चलते हुए हम लोग होटल पहुँच गए होंगे …करीब 1:30 pm के आस पास ….फिर वहां से निकलें होंगे करीब 2:30 – 3:00 pm के आस पास …

अब हम लोगों को तय करना था कि शाम तक ..कम समय में कौन से साईट देखकर वापस आया जा सकता था …होटल के  सबसे पास था …”परदेसी सिनगॉग”

1. परदेसी सिनगॉग (Pardesi synagogue) :

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 जी हाँ, सिनगॉग (synagogue) - यहूदी उपासनागृह,  जिसका नाम “परदेसी” शब्द से शुरू होता है, हैं ना रोचक, रोचक के साथ साथ ये काफी पुराना और ऐतिहासिक भी है, इसके नाम में जो “परदेसी” शब्द लगता है, उसका कारण ये है कि ये मूलतः स्पेनिश बोलने वाले यहूदियों द्वारा बनवाया गया था |

ये सिनगॉग अपने आप में इसलिए भी काफी महत्त्व रखता है कि पूरे राष्ट्रकुल (कॉमनवेल्थ) देशों में ये एकलौता सबसे पुराना सक्रिय सिनगॉग है | ये कोचीन के सबसे पुराने टाउन में से एक “जू टाउन (Jew Town)” में स्थित है |

“जू टाउन (Jew Town)” और “जू स्ट्रीट (Jew Street)” अपने आप में ही विरासत है, जहाँ भारत के यहूदियों की एक बड़ी संख्या रहती है |

पर दुर्भाग्यवश जब हम लोग  सिनगॉग (synagogue) पहुंचे तो ये बंद था, क्योंकि ये शनिवार को बंद रहता है, पर कोई बात नही, हमारे पास कल (रविवार) का समय और था, दूसरे दिन (रविवार) को हम लोगों ने सिनगॉग (synagogue) अन्दर से भी देखा |

अन्दर तो फोटोग्राफी की अनुमति नही थी, पर अगर आप अन्दर की वास्तुशिल्प देखना चाहें तो विकिपीडिया पर उपलब्ध ये एल्बम देख सकते हैं |

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"Jewish synagouge kochi india". Licensed under CC BY 2.5 via Wikimedia Commons.

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"Kochi Jewish Synagogue C" by Wouter Hagens - Own work. Licensed under Public Domain via Wikimedia Commons.

अपने आप में इतनी प्राचीन (सन 1567 ) विरासत को देखने का अनुभव ही बेहद अहम् रहा मेरे लिए …

इसके हम लोग “जू टाउन (Jew Town)” और “जू स्ट्रीट (Jew Street)” होते हुए …वापस होटल की तरफ निकल पड़े …पूरे दिन की थकान तो थी ही ..और साथ में अन्य साथी ब्लोगरों (चेन्नई और मुंबई से आने वालों ) से मिलने की जल्दी, सो फिर रास्ते में कुछ नहीं देखने की सोची, और अँधेरा भी हो चुका था |

२. “मैरीन ड्राइव बीच ” ( Marine drive, Kochi)

पर जैसे कैब ड्राईवर ने बताया कि “मैरीन ड्राइव बीच ” आ गया है, तो फिर मुझसे नही रहा गया, सारी थकान को एक तरफ रखकर …निकल  पड़े क्रिशमश के चलते ….दिवाली की तरह सजाये गए ..”मैरीन ड्राइव” …पर ..थकान के बावजूद ..करीब करीब आधा कि.मी. बीच चलते चलते पार किया ..तब पहुंचे मुख्य आकर्षक “रेनबो ब्रिज” पर …

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"Marine Beauty 3 DSW" by Augustus Binu/ www.dreamsparrow.net/ facebook - Own work. Licensed under CC BY-SA 3.0 via Wikimedia Commons.

उसके बाद सीधे होटल …

ये थी मेरी पोस्ट की पहली किश्त ..दूसरे दिन के लिए दूसरी पोस्ट की लिंक जल्दी ही शेयर करूँगा |