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“शौचालय” के लिए सब्सिडी नहीं….जागरूकता और इच्छाशक्ति चाहिए

एक देश जिसके युवा “विकसित” देश बनने का सपना देख रहे हो, उसमे 597 मिलियन लोग आज भी खुले में शौच करते हों, इससे ज्यादा शर्मनाक बात क्या हो सकती है | वो देश जिसके पास अपनी सबसे पुरानी  और समृद्ध सभ्यता हो, वो देश जब २१वीं सदी में भी खुले में शौच जैसी समस्या से निजात पाने के लिए लड़ रहा हो, तब यहाँ के जिम्मेदार नागरिकों की  जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ जाती है |

आज जब देश के प्रधानमंत्री विदेशों में जब अपने देश की समस्याओं को गिनाते है, तो उसमे “खुले में शौच” का भी जिक्र करते है, इससे सरकार की तो प्राथमिकता तो झलकती ही है, साथ ही हमारी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है, पर आज मैं यहाँ सिर्फ सरकारी स्तर पर इस समस्या के लिए क्या किया जा सकता है या क्या किया जा रहा है ..उस पर बात ना करके ..इसपर बात करना चाहूँगा कि हम आम नागरिक इसमें क्या कर सकते है |

क्योंकि व्यक्तिगत तौर पर मेरा मानना यही है कि ये सिर्फ सरकारी सब्सिडी से होना वाला नहीं है, इसके लिए लोगों में जागरूकता और इच्छाशक्ति का होना बहुत जरुरी है, उनका स्वयं ही इसकी उपयोगिता और आवश्कयता को समझते हुए इसमें भागीदार बनना …

इसके लिए घर में शौचालय होने के सबसे मजबूत पक्ष को मजबूती के साथ लोगों के सामने रखना होगा ..उसमे से एक है …”नारी की सुरक्षा तथा गरिमा”

  नारी की सुरक्षा तथा गरिमा

महिलायों के लिए, खासकर गांवों में “शौच” के लिए कोई उचित तथा सुरिक्षित व्यवस्था न होने के चलते आये दिनों हम समाचार-पत्रों में उनके साथ होने वाली अशोभनीय घटनायों के बारे में पढ़ते रहते हैं, इनमे कई तो बहुत ही गंभीर किस्म की होती हैं | ये तथ्य तो सभी के सामने खुला हुआ है …पर इसके अलावा भी कई छोटी छोटी बातें हैं …जैसे महिलायों की निजता, उत्पीड़न, शौच के लिए उन्हें सुरक्षित जगह ढूढने के लिए घर से काफी दूर बिना किसी सुरक्षा के जाना पड़ता है |

खासकर किशोरियों के लिए ये और भी अहम् हो जाता है , अगर हम Unisef की  रिपोर्ट के अनुसार स्कूलों में शौचालय की समुचित व्यवस्था ना होने से “ड्राप आउट अनुपात” में भी बढोत्तरी हुई है, साथ ही इससे लड़कियों में  अन्यत्रवासिता (ऐब्सन्टीइज़म) जैसी मानसिक अवसाद की स्थिति भी देखी गयी है |

अब बात करतें है, कि इस समस्या को ख़त्म करने के लिए हम सब को करना क्या है ?

जागरूकता ..और जागरूकता में इस मुद्दे को महिलायों और किशोरियों की गरिमा और सम्मान को जोड़ना है, जिससे कि इस अभियान को भावनात्मक रूप से और मदद मिलेगी |

अगर देखा जाए तो

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इस क्षेत्र में सरकार के साथ साथ निजी क्षेत्र के भी अहम योगदान देखने को मिल रहा है,

उदाहरण के तौर पर “हिंदुस्तान यूनीलीवर” और “डोमेक्स (Domex)” की “#ToiletForBabli” मुहिम,

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जिसके अंतर्गत महाराष्ट्र और उड़ीसा को पूर्णतः खुले में शौच से मुक्त बनाना है, आपके http://www.domex.in साईट पर किये गए प्रत्येक क्लिक के बदले ये 5 रु० इस नेक काम के लिए योगदान स्वरुप जायेंगे | तो इस तरह से आप भी इस मुहिम का हिस्सा बन सकते है |

आपको सारी जानकारी http://www.domex.in साईट पर मिल जायेगी |